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चाहत.....!
मुझको भी चाहिए अब एक महबूब,
शुरू में मुझसे जो प्यार करे खूब|
कुछ ही दिनों में दे जाय धोखा,
काश मुझको भी मिले एक मौका|

फिर बन जाऊं दूसरा देवदास,
लोगों को लगूँ मैं भी कुछ खास|
बने फ़िल्में चरित्र हो ऐसा अनोखा|
काश मुझको भी मिले एक मौका|

या शायरी में लिखूं बेवफाई की दास्तान,
ग़ालिब जैसा बनूँ एक शायर महान|
बन जाऊं मैं भी हीरो कुछ दिलों का,
काश मुझको भी मिले एक मौका|

या प्रेम पर लिख डालूँ कवितायेँ अनेक,
भीड़ में कवियों की गिना जाऊं एक|
बन जाऊं एक सबक इन प्रेमियों का,
काश मुझको भी मिले एक मौका|

या बन जाऊं जोगी लेकर दिल में बोझ,
उस अनजाने रहस्य की करूँ खोज|
जीवन समुद्र के लग जाये पार नौका,
काश मुझको भी मिले एक मौका |
posted by Harish Chandr @ 9:40AM on date 20-03-2011
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2 comments
बहुत खूब जनाब..
मेरे और आपके ख्यालात बहुत मिलते है..
आपके अगले लेख के इंतजार में..
आपका प्रशंशक..
commented by Shankar Das @ 10:29PM on date 21-03-2011
मान्यवर, मौके तो जीवन में बहुत आते है,
पर हम ही पहचान नहीं पाते है,
काश मुझको भी मिले एक मौका,
तब भी मई येहि कहता...
काश मुझको भी मिले एक मौका...

आपकी कविता में एक सुन्दरता है,
लिखते रहिएगा....
commented by NISHA DAS @ 10:26PM on date 21-03-2011
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