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देख
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आशियां तो जलाए होगें कभी मुझे जला के देख
मैं आज भी वहीं हूं कायम मुझे हिला के देख
कौन बसाएगा अब उजडी हुई बस्तियां इस शहर में
क्या क्या नहीं बीती इश्क का इतिहास उठा के देख
कुछ कहो या ना कहो उम्मीदे वफा लगाना गलत है
ना हो गर यकीं तुझे तो दिल अपना लगा के देख
इस दौर कौन करता है किसकी परवाह चल तू ही बता
चल अब इस दौर किसी को तू आजमा के देख
हर तरफ बुराई ही बुराई है इस दौर इस जहां में
कहने वाले कभी तू इधर जरा आके देख
तिजारत के शहर कहां अब वफा काम आती है
आ तू कभी इस शहर खुद को मिटा के देख
मिलन फिर भी आज जी तो रहा है मुस्कुरा के
तू एक पल भी इस राह में कभी मुस्कुरा के देख
posted by MILAN AJMERI @ 12:34AM on date 15-03-2015
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