Welcome Guest, Login | Register
Home | Medical | City Info | Image Gallery | Babies Name | Utilities | Poetry | Recipe | Joke/SMS | Articles | Hostel | Trade Events| MPDarshan
 
क्यूं नही लेते

भीगी हुई रातों का मजा क्यूं नहीं लेते
भीगी हुए मौसम में रुहों को मिला क्यूं नहीं लेते
क्ब तक रहेगी यह दूरियां ए जानेमन
दिलों के बीच की दीवार गिरा क्यूं नहीं लेते
क्यूं सुलगते हो तडपाते हो दिल को अपने
बरसाती हवाओं में उन्हे मना क्यूं नहीं लेते
क्यूं हो गए हो खफा इस हालाते दौर
वो रुठे हैं अगर चे तो मना क्यूं नहीं लेते
तमाम उन गिले शिकवे को भुलाकर तुम
दिल से दिल को सनम मिला क्यूं नहीं लेतें
कब तक रहोगे अंधेरो में इतना तो बता दो
बुझी शमा को फिर से आज जला क्यूं नही लेते
पाकीजगी और इश्क में इस दौर मिली है मिलन
तो फिर उस शख्स को हमदर्द बना क्यूं नहीं लेते
posted by MILAN AJMERI @ 12:04AM on date 02-03-2015
Views (405)
0 comments
Valid XHTML 1.0 Transitional   Valid CSS!
esagar.com © 2009-2011 All rights reserved | Powered by Das Consultancy Services