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क्या करुं

रह रह कर वो याद आए तो क्या करुं
याद उनकी जगाए तो क्या करुं
जितनी भी की कोशिशें हुई तमाम नाकाम
अतीत उधर ही ले जाए तो क्या करुं
सोचा था कि ना जाएगें साकीं के रुबरु
चिलमन से अगर बुलाए तो क्या करुं
बहलाने को दिल को कहां कहां नहीं गया
परछाईयां तेरी साथ आए तो क्या करुं
राहे वफा में मेने खुद को भुला दिया मिलन
अगर यह भी ना उन्हे रास आए तो क्या करुं
posted by MILAN AJMERI @ 12:07AM on date 02-03-2015
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