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आ गया हूं


आ गया हूं
मैं कहां से कहां आज आ गया हूं
जिन्दगी में दुनिया पे छा गया हूं
अप्सराएं थी खडीं राहों में मगर
यकीनन दाद उनसे पा गया हूं
कोशिशें तूफां ने कश्ती डूबोने की
मगर उस तूफां को भी खा गया हूं
गैरों ने तो दिया है हौसलां हमेशा
अपनो ही से मगर छला गया हूं
देखा ही नहीं दामन को अपने
दुआ सभी के लिए करता गया हूं
नजर की अंदाज गैरों ने मगर
चाहने वालों की नजर में खटकता गया हूं
बुजुर्गो की है दुआएं मिलन साथ में
मिली है शोहरतें मुझे जहां गया हूं
posted by MILAN AJMERI @ 12:37AM on date 15-03-2015
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