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याद है
याद है
होठों पे सजाया था तूने क्या वो तराना याद है
लगा के मेहंदी ना आने का वो बहाना याद है
रंग बरस रहे थे और गुलाल भी थी शरीक
एक दूजे को रंगना रंगाना वो जमाना याद है
बातों ही बातों में हो जाया करती थी सेहर
ऐ सनम मेरे क्या तुझे वो जमाना याद है
वो बरसाती दौर में मुलाकातें अपनी
बिजलीयों के डर से करीब आना याद है
चांदनी रातों में तेरे शानों पे रखा था सर
नजर से दिल में उतर जाना याद है
दिल जलों का बहाना था बात कुछ और थी
जलते चिरागों को बुझाना याद है
किसने रख दिया हाथ दुखती रगो पे आज मिलन
कौन है वो शख्स शेदा क्या उसका ठिकाना याद है
posted by MILAN AJMERI @ 12:47AM on date 16-03-2015
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